क्या एक पते पर 2 सोसायटी रजिस्टर हो सकती हैं?: जानिए MP सोसायटी अधिनियम 1973 के नियम मध्य प्रदेश में जब भी कोई सामाजिक कार्यकर्ता, ट्रस्टी या संस्था क

क्या एक पते पर 2 सोसायटी रजिस्टर हो सकती हैं?: जानिए MP सोसायटी अधिनियम 1973 के नियम
मध्य प्रदेश में जब भी कोई सामाजिक कार्यकर्ता, ट्रस्टी या संस्था के सदस्य किसी नई संस्था/समिति (Socity/NGO) का गठन करते हैं, तो हमारे सामने अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या पहले से रजिस्टर्ड/पंजीकृत किसी संस्था के पते पर ही दूसरी सोसायटी का पंजीकरण (Registration) कराया जा सकता है। क्योकि कुछ लोगो में यह भ्रान्ति रहती है कि एक पते पर केवल एक संस्था/समिति का संचालन होना चाहिए | हम इस सवाल को मध्य प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 (क्रमांक 44, सन् 1973) की धाराओं और कानूनी प्रावधानों के साथ विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे |
उ. हाँ, अधिनियम में एक ही व्यक्ति के अलग-अलग सोसायटियों में सदस्य या पदाधिकारी बनने पर कोई वैधानिक रोक नहीं है, बशर्ते संबंधित सोसायटी के उपनियमों (Rules/Bye-laws) में ऐसी कोई रोक न हो।
प्र. क्या किसी निजी आवास (घर) के पते पर दो सोसायटियां रजिस्टर हो सकती हैं?
उ. हाँ, यदि मकान मालिक की वैध NOC और पते का प्रमाण उपलब्ध है, तो आवासीय पते पर भी दो सोसायटियां पंजीकृत की जा सकती हैं।
अतः: हम कह सकते हैं कि मध्य प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 के तहत एक ही पते पर दो या अधिक सोसायटियों का रजिस्ट्रेशन पूर्णतः वैध और नियमानुसार है। बस आवेदन के समय संपत्ति स्वामी की NOC और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करके तथा दोनों संस्थाओं के स्वतंत्र वित्तीय एवं प्रशासनिक रिकॉर्ड बनाए रखकर इसका सुचारू संचालन किया जा सकता है।
Note: उपरोक्त नियम हाउसिंग सोसायटी पर लागु नहीं होते है | हाउसिंग सोसायटी के सन्दर्भ में एक ही स्थान पर दो सोसायटी का पंजीकरण सामान्य तौर पर मान्य नहीं है |
मध्य प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 (हिंदी)
पंजीयन संबधित अधिनियम की प्रमुख धाराएं (Registraion Related Sections)
मध्य प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 अथवा मध्य प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण नियम, 1998 में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है जो एक ही पते पर दो संस्थाओं के संचालन को रोकता हो। अधिनियम की संबंधित धाराएं इस प्रकार हैं:- धारा 6(1)(ग) [Section 6(1)(c)] - पंजीकृत कार्यालय का स्थान: इस धारा के अनुसार सोसायटी के ज्ञापन/नियमावली (Memorandum of Association) में केवल सोसायटी के प्रधान कार्यालय (Head Office) का स्थान दर्ज होना अनिवार्य है, जिससे रजिस्ट्रार का अधिकार क्षेत्र तय हो सके। कानून उस परिसर के अनन्य (Exclusive) होने की शर्त नहीं रखता।
- धारा 6(2) [Section 6(2)] - नाम संबंधी प्रतिबंध: यह धारा किसी पूर्व पंजीकृत सोसायटी के समान या मिलते-जुलते नाम के पंजीकरण पर रोक लगाती है। यह प्रतिबंध संस्था के नाम और पहचान पर लागू होता है, उस समिति के पते पर नहीं।
-
धारा 7 [Section 7] - रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया:
यदि आवेदन पत्र, उद्देश्य और नियमावली अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप हैं, तो रजिस्ट्रार पंजीयन प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत हैं।
[सोसायटी के रजिस्ट्रेशन हेतु आवश्यक दस्तावेज और उद्देश्य]
आवश्यक दस्तावेज और ऑनलाइन औपचारिकताएं
MP Online पोर्टल के माध्यम से समान पते पर नई सोसायटी का आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं:- अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): भवन या कार्यालय के वास्तविक मालिक (Property Owner) द्वारा हस्ताक्षरित अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC), जिसमें इस पते पर नई सोसायटी के कार्यालय संचालन की स्पष्ट अनुमति दी गई हो।
- पते का प्रमाण (Address Proof): नवीनतम बिजली बिल, संपत्ति कर (Property Tax Receipt) रसीद, रजिस्ट्री की प्रति या वैध किरायानामा (Rent Agreement)।
- पदाधिकारियों के पहचान एवं निवास प्रमाण: संस्थापकों और प्रबंधकारिणी के सदस्यों के आधार कार्ड, पैन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र।
संचालन संबंधी वैधानिक प्रावधान ( Provisions related to Operations)
भले ही दो समितियों का पता एक हो, लेकिन अधिनियम के तहत दोनों सोसायटियां अलग विधिक व्यक्ति (Separate Legal Entities) होती हैं, इसलिए निम्नलिखित प्रावधानों का ध्यान रखना अनिवार्य है:- धारा 16 [Section 16] - सदस्यता पंजी: दोनों सोसायटियों की सदस्यों की सूची और रजिस्टर (Register of Members) अलग-अलग बने होने चाहिए और नए सदस्य के प्रवेश की एंट्री 30 दिनों के भीतर सदस्यता पंजी में करना अनिवार्य है | समय पर प्रविष्टि न करने पर दोषी पदाधिकारियों 500 रु. तक का दंड का प्रावधान है |
- धारा 25 [Section 25] - खाते (Accounts): प्रत्येक समिति को अपने हिसाब-किताब की पुस्तके प्रधान कार्यालय पर रखनी होगी | प्रत्येक समिति का अलग पैन कार्ड, अलग बैंक खाता, अलग कैश बुक होनी चाहिए | इनमे समिति द्वारा प्राप्त एवं व्यय की गई राशी, संपत्तियों एवं देनदारियों का स्पष्ट विवरण होना चाहिए संपत्ति और दायित्वों का उल्लेख होना चाहिए। जो समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों और रजिस्ट्रार या उनके अधिकृत अधिकारीयों के निरिक्षण उपलब्ध होनी चाहिए |
- धारा 27 [Section 27] - वार्षिक सूची दाखिल करना: प्रत्येक वर्ष प्रबंध समिति (Governing Body/Working Committee) के अलग-अलग सदस्यों की सूची निर्धारित प्रारूप में रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा की जानी चाहिए।
- धारा 28 [Section 28] - अंकेषण (Audit) : प्रत्येक वर्ष प्रबंध समिति द्वारा वित्तीय वर्ष समाप्त होने 90 दिनों के भीतर किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से समिति के खातो का ऑडिट कराकर निर्धारित शुल्क के साथ आडिट रिपोर्ट और बैलेंस शीट रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा करना अनिवार्य है | इसमें विलम्ब होने पर दंड शुल्क का भी प्रावधान है | [सोसाइटी पंजीयक को भेजे जाने वाली वार्षिक जानकारी]
- कार्यवाही पंजी (Minutes Book): साधारण सभा (AGM) और प्रबंध कार्यकारिणी की बैठकों का विवरण अलग-अलग रजिस्टरों में दर्ज होना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्र. क्या दोनों सोसायटियों में एक ही व्यक्ति पदाधिकारी हो सकते हैं?उ. हाँ, अधिनियम में एक ही व्यक्ति के अलग-अलग सोसायटियों में सदस्य या पदाधिकारी बनने पर कोई वैधानिक रोक नहीं है, बशर्ते संबंधित सोसायटी के उपनियमों (Rules/Bye-laws) में ऐसी कोई रोक न हो।
प्र. क्या किसी निजी आवास (घर) के पते पर दो सोसायटियां रजिस्टर हो सकती हैं?
उ. हाँ, यदि मकान मालिक की वैध NOC और पते का प्रमाण उपलब्ध है, तो आवासीय पते पर भी दो सोसायटियां पंजीकृत की जा सकती हैं।
अतः: हम कह सकते हैं कि मध्य प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 के तहत एक ही पते पर दो या अधिक सोसायटियों का रजिस्ट्रेशन पूर्णतः वैध और नियमानुसार है। बस आवेदन के समय संपत्ति स्वामी की NOC और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करके तथा दोनों संस्थाओं के स्वतंत्र वित्तीय एवं प्रशासनिक रिकॉर्ड बनाए रखकर इसका सुचारू संचालन किया जा सकता है।
Note: उपरोक्त नियम हाउसिंग सोसायटी पर लागु नहीं होते है | हाउसिंग सोसायटी के सन्दर्भ में एक ही स्थान पर दो सोसायटी का पंजीकरण सामान्य तौर पर मान्य नहीं है |
Refernce
M.P. SOCIETY REGISTRIKARAN ADHINIYAM, 1973 (English)मध्य प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 (हिंदी)
COMMENTS