जिला न्यायालय में न्यायालयों के प्रकार एवं विचाराधीन मामलों का वर्गीकरण भारतीय न्याय व्यवस्था में जिला स्तर पर न्यायालयों को मुख्य रूप से दो अधिकार क्
जिला न्यायालय में न्यायालयों के प्रकार एवं विचाराधीन मामलों का वर्गीकरण
भारतीय न्याय व्यवस्था में जिला स्तर पर न्यायालयों को मुख्य रूप से दो अधिकार क्षेत्रों में बांटा जाता है: दीवानी (सिविल) और फौजदारी (आपराधिक)। एक ही न्यायिक अधिकारी जब दीवानी मामले सुनते हैं तो उन्हें जिला न्यायाधीश और जब आपराधिक मामले सुनते हैं तो उन्हें सत्र न्यायाधीश कहा जाता है।
1. जिला न्यायालय परिसर में न्यायालयों के प्रकार (Types of Courts)
| न्यायालय का नाम | पीठासीन अधिकारी | क्षेत्राधिकार एवं कार्य |
|---|---|---|
| प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय | प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Principal District & Sessions Judge) | जिले का सर्वोच्च न्यायालय; गंभीर आपराधिक विचारण, उच्च मूल्य के सिविल वाद व अपीलें। |
| अपर जिला एवं सत्र न्यायालय | अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ / ASJ) | जिला जज के समान शक्तियां; स्थानांतरित दीवानी व गंभीर सत्र विचारण। |
| सिविल न्यायालय (वरिष्ठ श्रेणी) | सिविल जज सीनियर डिवीजन / व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खंड | अधिक वित्तीय मूल्य (Pecuniary Value) वाले दीवानी एवं संपत्ति वाद। |
| सिविल न्यायालय (कनिष्ठ श्रेणी) | सिविल जज जूनियर डिवीजन / व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड | सीमित वित्तीय मूल्य वाले प्राथमिक स्तर के दीवानी व बेदखली के वाद। |
| मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय | मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) / CMM (महानगरों में) | 7 वर्ष तक के कारावास से दंडनीय अपराधों की सुनवाई एवं मजिस्ट्रेटों का पर्यवेक्षण। |
| न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) | न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (JMFC) | 3 वर्ष तक के कारावास एवं जुर्माने से संबंधित आपराधिक मामले (उदा. चोरी, चेक बाउंस)। |
| पारिवारिक न्यायालय (Family Court) | प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय | विवाह, तलाक, बच्चों की कस्टडी और भरण-पोषण से संबंधित विवाद। |
| विशेष न्यायालय / अधिकरण (Special Courts) | विशेष न्यायाधीश (Special Judge) | पोक्सो (POCSO), एससी/एसटी एक्ट, एनडीपीएस (NDPS) एवं मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT)। |
2. जिला न्यायालय में आने वाले मामलों के प्रकार (Types of Cases)
(क) दीवानी मामले (Civil Cases)
- संपत्ति एवं भूमि विवाद: स्वामित्व का निर्धारण (Declaration of Title), अवैध कब्जे से मुक्ति, बटवारा (Partition Suit) और सीमांकन विवाद।
- संविदा उल्लंघन एवं धन वसूली: व्यावसायिक लेन-देन में अनुबंध का उल्लंघन, बकाए की वसूली हेतु संक्षिप्त वाद (Summary Suits - Order 37 CPC)।
- स्थाई एवं अस्थायी व्यादेश (Injunction): किसी संपत्ति को बेचने, तोड़ने या निर्माण कार्य पर न्यायालय द्वारा स्थगन (Stay Order) प्राप्त करना।
- उत्तराधिकार एवं वसीयत: उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate), वसीयत का प्रमाणीकरण (Probate) एवं कानूनी वारिस निर्धारण।
- पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद: तलाक याचिका, दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना (RCR), भरण-पोषण (Maintenance) एवं बच्चों का संरक्षण।
- किराया एवं बेदखली मामले: मकान मालिक और किरायेदार के बीच किराया विवाद व संपत्ति खाली कराने से जुड़े मामले।
(ख) फौजदारी / आपराधिक मामले (Criminal Cases)
- मानव शरीर के विरुद्ध अपराध: हत्या (Murder), हत्या का प्रयास, गैर-इरादतन हत्या, मारपीट एवं अपहरण से संबंधित सत्र विचारण।
- संपत्ति के विरुद्ध अपराध: डकैती, लूटपाट, चोरी, गृह-अतिचार (House-trespass) एवं आपराधिक न्यासभंग।
- महिलाओं व बच्चों से संबंधित अपराध: घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, दुष्कर्म तथा पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) के अंतर्गत मामले।
- आर्थिक एवं धोखाधड़ी अपराध: जालसाजी (Forgery), धोखाधड़ी (Cheating), गबन एवं फर्जी दस्तावेज तैयार करना।
- परक्राम्य लिखत अधिनियम (धारा 138): चेक बाउंस एवं अनादर से जुड़े परिवाद (Complaints)।
- मादक पदार्थ एवं नशा तस्करी: नारकोटिक्स एक्ट (NDPS Act) के अंतर्गत अवैध मादक पदार्थों की बरामदगी और तस्करी।
- जमानत आवेदन (Bail Matters): अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) और नियमित जमानत (Regular Bail) की सुनवाई।
(ग) अपीलीय एवं विशेष क्षेत्राधिकार (Appellate & Special Jurisdiction)
- दीवानी अपीलें (Civil Appeals): कनिष्ठ एवं वरिष्ठ सिविल जजों द्वारा पारित आदेशों व डिक्रियों के विरुद्ध जिला न्यायालय में प्रथम अपील।
- आपराधिक अपीलें एवं पुनरीक्षण (Criminal Appeals & Revisions): न्यायिक मजिस्ट्रेटों (JMFC/CJM) द्वारा दिए गए दोषसिद्धि या दंडादेश के विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील।
- मोटर दुर्घटना दावा (MACT): सड़क दुर्घटनाओं में शारीरिक क्षति या मृत्यु होने पर बीमा कंपनियों एवं वाहन मालिकों से प्रतिकर/मुआवजा प्राप्त करना।
- श्रम एवं औद्योगिक विवाद: कर्मचारियों और नियोक्ताओं के मध्य वेतन, ग्रेच्युटी तथा अवैध निष्कासन से संबंधित विवाद।

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